Mohabbat To Kaayam Rahatee Hai

हुजूम यूँ ही नहीं ‘उमड़ पड़ता तेरी “हवेली के बाहर,
सबको पता है यहाँ किसी शायर की गज़ल रहती है l

किस कदर अजीब है ये सिलसिला-ए-इश्क़,
मोहब्बत तो कायम रहती है पर इन्सान टूट जाते है।

थोड़ी ज्यादा हिफाजत करना
ए मेरे मालिक उस की ..
कि आखिर उस जान में,
मेरी भी जान बसती है …

खुद तलाशना क़ातिल अपना.और फिर क़त्ल होना…
इसी फनकारी को..बदकिस्मती से इश्क़ कहते है…!!

इश्क़ में जिसने भी दिल पे चोट खाई है,
वह समझ सकता है शायरी एक दवाई हैl

मोहब्बत कब हो
जाए किसे पता….!,
हादसे पूछ के नहीं
हुआ करते…..😊❤️ !!

हाथ होता तो कब का छुड़ा लेते
पकडे़ बैठें है वो निगाहों से हमें!!!

मुझे इस बात का अफ़सोस ज़िन्दगी भर रहेगा..
मैंने तुमसे तुम्हारी बजहा से बात करना छोड़ा दिया…!!

ताउम्र जलते रहे हैं धीमी आंच पर…
तब जाकर ये चाय और इश्क़ मशहूर हुए है…!!

☕️☕️😔

दोस्ती के दाबे मुझे नहीं आते यारों….
एक जान है… जब दिल चाहें माँग लो…!!

जहा से तेरा मन चाहे वहा से मेरी ज़िन्दगी को पढ़ ले तू,
पन्ना चाहे कोई भी हो, हर पन्ने पे तेरा ही नाम होगा.

किस जगह रख दु तेरी याद के चिराग को
की रोशन भी रहूँ और हथेली भी न जले !

यू ना खींच मुझे अपनी तरफ़ बेबस करके
ऐसा ना हो खुद से भी बिछड़ जाऊ और तू भी ना मिले…!!

इश्क़ का तो पता नही लेकिन जो तुम से हुआ वो किसी से नहीं….!!

कुछ इस तरह भी याद करते हैं…लोग हमें
चल यार चाय ☕️पी कर आते हैं….!!

तुम चाय की तरह मोहब्बत किया
करो,
मैं बिस्कुट की तरह डूब ना जाऊं तो कहना।


तुम्हें देखता है कोई अधूरे ख्वाबों में अक्सर,
अनजान सफ़र के मुसाफ़िर इत्तेफाक नहीं होते..!!❤️❤️


तुम्हे खैरात में मिल जायें हम वो नहीं !!
आरज़ू तभी पूरी होगी जब शिद्दत से चाहोगे …!!


इश्क़ की नौकरी मिलती नहीं खैरात में,
दिल में फकीरी और फितरत सुफियानी चाहिए।।


दूरियां कितनी भी क्यूं न हो तुमसे
एक डोर अहसास की करीब रखती है
तुमको मुझसे……..!!


लोग हमसे सुकून भरी ज़िंदगी का मशवरा मांग रहे ,
अब हर किसी को तुम्हारा पता कैसे बतायें…

मेरे लफ़्ज़ों की पहचान अगर वह कर लेता…..
उसे मुझसे ही नहीं खुद से ही मुहब्बत हो जाती…!!!

ये रूठना मनाना अदाए है मोहब्बत की..!
चटपटा न हो तो खाने में मजा ही क्या है..!

खुद को किसी की अमानत समझकर
हर वक़्त वफादार रहना भी इश्क हैं ❤️

तेरा अहसास मेरी हर सांसो में बसा है,
इश्क के नाम पर अब तेरा ही नशा है,,,,,,

गज़ब की बदली हुई है वो.. मेरे इश्क के बाद,
नाम भी कोई ले मेरा तो दुपट्टा ओढ़ लेती है…☺️💕

माना तू मुकम्मल दरिया है इश्क का
है मगर फिर भी मुन्तज़िर बूँद है…!!

निगाहें मुंतज़िर हैं किस की दिल को जुस्तुजू क्या है
मुझे ख़ुद भी नहीं मालूम मेरी आरज़ू क्या है ।

लफ्ज़ तोह करेंगे इशारा जाने का……!!!
तुम आँखें पढ़ना और रुक जाना….

मुझ को तो होश नही तुम को ख़बर हो शायद,
लोग कहते हैं की तुमने मुझे बर्बाद कर दिया…!!

शायद लोगों की नजरो में हमारी कोई कीमत ना हो
लेकिन कोई तो होगा जो
मेरा हाथ पकड़ कर खुद पर नाज़ करेगा…!!

ख़्याल उन्हीं के आते है जिनसे दिल का रिश्ता हो…
हर शख्स अपना हो जाए सवाल ही पैदा नहीं होता…!!


फ़ितूर होता है हर उम्र का अपना अपना साहब
पहले खिलौना,
फ़िर इश्क़, औऱ
फिर पैसा
फ़िर ख़ुदा…!!


वो गए कुछ यूं…के जैसे कभी थे ही नही…
मैं उस क़िताब का पहला पन्ना हु…
जिसके होने ना होने से किसी को कोई फर्क नही पड़ता…!!

उसकी मोहब्बत तो मुकद्दर है मिले न मिले..
तसल्ली तो मिल ही जाती है उसकी यादो से इस दिल को…..!!

ये जिस्म से उभर कर मेरी मोहब्बत रुहानी हो गई,
तेरे इश्क़ में यारा मैं बिन फेरो के सुहागन हो गई…….
😘😘


चाय सिर्फ़ चाय होती हैं
ये दवा है……
दर्द की…
दुख की …..
मोहब्बत की………


महंगी शराब दुनिया के हर कोने में मिल जाती,
बस माँ तेरे हाथों की चाय का स्वाद कहीं न मिला….!!


एक तेरे साथ दुनिया से बगावत कर बैठी,
औऱ एक तेरे साथ के बिना खुद से भी हार गई हूं….!!


इश्क़ में अब मैं उस मुक़ाम पर पूछ गई हो…
जहा नज़रे किसी ओर को देखे तो गुनाह लगता है….


तुम्हारा हर अनकहा सुना मैंने
मेरा हर कहा
अनसुना करते गए तूम…..


गर कहूं मैं की इश्क है मुझे,
तुम दौड़ के गले से
लगा लोगे क्या ?


हमारे शब्दो से बहकने की शिकायत ना करे….
इनमे शब्दो मे नशा तुम्हारे इश्क़ का ही है…..!!


पहली मोहब्बत अक्सर एक बात सिखा कर जाती है,
दूसरी जब भी करना एक हद में रहकर करना ।


कभी तो इतने पास आओ….
कि दिल को दिल से मिलने की चाहत हो जाए…….


जो लमहे तक़दीर में लिखे नही होते…!!!
उन की आरज़ू को ही इश्क़ कहते हैं…!!!

मेरी शायरियों का बस इतना उसूल है..!!
तेरी वाह से मुकम्मल, वर्ना फिजूल ….!!!!

दूध भी वही,
शक्कर भी वही,
मिठास भी वही,
बस फ़र्क इतना,
वो कॉफी के चाहनेवाले
और हम चाय के दीवाने…..☕️☕️

खुद-ब-खुद शामिल हो गए तुम मेरी साँसो मे…
हम सोच कर तो फिर मोहब्बत ना करते…!!

हम शिकायत किस्से करे दोनों तरफ दर्द का माहोल है…
हमारे आगे मोहब्बत है और उनके आगे जमाना है….

उन्होंने बस महबूब ही तो बदला है इसका गिला क्या करना…
लोग दुआ कुबूल न होने पर खुदा तक बदल देते हैं….


हमारे शब्दो से बहकने की शिकायत ना करे….
इन शब्दो मे नशा तुम्हारे इश्क़ का ही है…..


हम चाय पीकर कुल्हड़ नहीं तोड़ पाते,
दिल तो खैर , बहुत दूर की बात हैं ….


तेरे इश्क़ ने मेरे इश्क़ की तस्वीर बदल दी,
तू इतनी बदली तेरे रांझे ने हीर बदल ली…


सब्र तहजीब है मुहब्बत की साहब और तुम समझते हो बेज़ुबाँ है हम!

लहजा, फिक्र ओ जुनून जता देगा मालिकाना हक़,,
फकत… दस्तख़त से ….कौन किसका होता है…!!


मेरी दुआओं का मुकम्मल होना
और,,,
तेरा मुस्कुराना एक ही बात है.


मोहब्बत का सिला चाहे जैसा भी हो..!!
मोहब्बत ताउम्र रहती है साहिबा…!!!!


मोहब्बत सिर्फ शुरू होती है
खत्म कभी नहीं होती……


मुझे तो तोहफे में अपनो का वक्त पसंद है
मगर आज कल इतने महगें तोहफे देता कौन है..!! 😐


सुनो कभी तुम नाराज़ हुए तो हम झुक जायगे आपके सामने….
और जो कभी हम नाराज़ हुए तो गले से लगा लेना आप बस मुझे…..


सिलसिला अब भी बही जारी है,
तेरी यादे मेरी नींदों पर भारी है…


तेरे सिवा मुझे सिर्फ नींद से ही प्यार था..
कमबख्त वो भी ख़फ़ा हो गई तेरे बाद ….


ना सिर्फ कागज कलाम तुझे लिखे के लिए ये राते भी ज़ुरूरी है ….
ओर एक तस्वीर के सहारे कितने दिन गुज़ारूगी भला…..
जिंदा रहने के लिए कुछ मुलाकाते भी ज़ुरूरी है….


चाय के नशे में मैं चूर होती जा रही हूँ..
मैं तुझे लिखते-लिखते मशहूर होती जा रही हूँ…☕️


मैं खुद को नही समझती तुम को क्या समझूगी…
तूम कहते हो कि समझे हो मुझे…तो बताओ जनाब कैसी हु मैं….


होने तो दो ज़रा उनको भी तन्हा….
!!!फ़िर देखना,,,,
याद हम भी उन्हें बेहिसाब आएंगे..


इश्क़ से मैने कल क्या खूब बदला लिया…
कागज़ पर लिखा उसे और इश्क़ ज़ला दिया..!!


डर लगता है अब आपकी तारीफ करने में,
कहीं पूंछ ना बैठो मै तेरा कौन लगता हूं ….


वज़ह की तलाश ना तब थी, ना अब है,
बेवज़ह तुझे याद करना, आदत है मेरी..!!


क्या खूब कहते थे वो हमसे कि फुर्सत नही मिलती…
इन दिनों उनका ये झूट भी पकड़ा गया….


तोहमतें तो लगती रही हम पर
रोज़ नयी नयी

पर इल्ज़ाम जो सबसे हसीन लगा
वो तुझसे वफ़ा का था ……!!


बस इतनी सी बात है…..
तुम साथ रहते हो जब मेरे, खुस तब रहते है गम मेरे …
तुम शामिल रहते हो मेरी हर बात में ऐसे ख़ास नही है सब मेरे लिये…


दुनिया के लिए नही खुद के लिए जिया करो…
अकेले ही चाय बनाकर कर पियो….


मुद्दते बीत गई तेरी याद ना आई हमे,
पर साहब तुझे भूल गए हो हम ऐसा भी नही ….


ज़िन्दगी रही तो फिर मिलेंगे दोस्तो मौत का मौसम चल रहा है….
मुलाकात का वादा नही कर सकती…


तुम किताब-ए-जिंदगी का
एक पन्ना खाली रखना
कभी जो याद आऊँ मैं तो
मेरा नाम लिख देना।


कभी अल्हड़ नदी सी ।।
कभी महकती कली सी लगती हो
आज कल कुछ खोई खोई कुछ बेचैन सी लगती हो
अपने मन मे उठते उनमुक़त ख़यालो को सम्हालो
विरह की पीड़ा से ग्रस्त तुम मीरा सी लगती हो ।।


दोस्ती मोहताज़ हो सकती है दो-शख्स की
पर इश्क़.. इश्क़ तो एकतरफ़ा ही काफी है
जनाब …


मेरी रूह से लिपटे रहते है, तेरी यादों के अहसास।।
अब कैसे बताऊँ दुनियाँ को,
तू दूर है या पास….


उन्हें ये ज़िद थी कि हम बुलाते…❤️❤️
हमें ये उम्मीद कि वो पुकारें…🤗😍


मैं तुझ में बँट जाऊँ,कुछ यूँ उधार लो मुझको….
जो नज़र ना आऊँ तो ,रुह में उतार ले मुझको…!


बस इतनी सी बात है…..
तुम साथ रहते हो जब मेरे खुस तब रहते है गम मेरे …
तुम शामिल रहते हो मेरी हर बात में ऐसे ख़ास नही है सब मेरे लिये…


खुदा सलामत रखे दोनो घर…
मैं उनके वो मेरे दिल मे रहते है…


‘वो’ रख ले कहीं “अपने” पास हमें ‘कैद’ करके…
काश कि “हमसे” कोई ऐसा ‘गुनाह’ हो जाये!


मेरी मोहब्बत की न सही,
मेरे सलीके की तो दाद दे,
तेरा जिक्र रोज करता हूँ,
तेरा नाम लिए बगैर…!!!

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